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Sister

दीदी तो मां जैसी  होती  है  और  उसका  प्यार  ममता ही होती  है  उसकी डाँट पापा जैसी  उसकी सलाह दादा जैसी  वो हमजोली  भी दोस्त जैसी होती है  उसकी बातें बिल्कुल मेरे मन जैसी होतीं  हैं  और उससे दूरी कुछ  ग्रहन जैसी  होती है  अखिर जो  सबकुछ पूरा  कर दे  जिसमें  हर रिश्ता हो  वो बहन ही तो होती  है  मेरी दीदी भी मुझे माँ जैसी लगती  है।                                      With love :)                                                       Your brother                                                        ...

Mother

क़रीब हो मगर अब दिखती नहीं , जबसे तुम गई ; इस मोहल्ले खुशियां बिकती नहीं ।। बस्ती ऐसा भी नहीं कि खाली है भीड़ सी लगी रहती है पर तुम्हें तो पता है ना ! भीड़ किसी के लिए रुकती नहीं ।।             -शैल स्मृति

In memory of my mother

मां तू मेरा सवेरा सा  फिर क्यों यहां इतना अंधेरा सा मां मैं तेरा वो अंश  जो तेरे बिना ताउम्र अधूरा सा पर मां मेरे मन का इक कोना जो आज भी नहीं है सूना  तेरी हंसी  तेरी आंखें  तेरी हर इक बातें  तेरी परवाह तेरी सलाह  मेरी घंटों तकना राह  सब इस कोने में कैद है  बस ईश्वर का इतना ही अब मुझपे फ़ैज़ है  मां साथ ही चलेंगे  साथ ही हसेंगे  साथ ही रो लेंगे  साथ ही सब होगा  बस तू दिखेगी नहीं बाकी हर पल तेरा एहसास होगा ।।                                     स्मृति शैल ( मेरी लेखनी से)

ज़िन्दगी के एक मोड़ पर

जब मन सुबह जब मन शाम कर लेते हैं  कुछ ऐसे हम ज़िन्दगी के जाम पी लेते हैं इनसे ना उनसे  बस खुद से मिलकर किस्से तमाम कह लेते हैं   कुछ ऐसे हम - - - -  रोना क्या ?हंसना क्या ? हम तो अपने मन को बस शांत कर लेते हैं कुछ ऐसे हम - - - - मोहब्बत के लिए बस मकाम है  बस उसी को रोज़ याद - और उसी के लिए काम कर लेते हैं कुछ ऐसे हम - - -  बड़ा नशा है मंजिल की राह से रोज़ फूल चुनने में हम ख़ार जब आये तो इत्मीनान कर लेते हैं  बस ऐसे ही ज़िंदगी के जाम पी लेते हैं ।।                         - स्मृति तिवारी (मेरी लेखनी )

Never Give Up - Try Some New Ideas To Get Out Of Your fear or failure

रात के अंधेरे में गुमनाम सी,  वो लड़की ! खुद को जिताने के लिये फिर एक बार  नए तरीके आजमाती रही ; होठों की हंसी को आंखों  से गाती रही,  आंखों के मोती से बालों को सजाती रही ।।                                             -   Smriti Tiwari                 (meri  lekhani se)

A pleasant home coming

मृणाल की मृणालिनी ने मृणाल से है कुछ कहा तुम्हारा ये ढंग रंग ,भंग शांति कर रहा । है क्या खास राज आज तुमने जो न कहा !! खिले खिले हिले मिले ये भाव तुम्हारा क्या कह रहा ?? मृणालिनी के ...

भले ही ! मुझे

भले ही ! मुझे , आंधियों से बह के यहां से गुजर जाना हो । बारिश सा बरस के कहीं बह जाना हो । आग सा दहक कर इक दिन बुझ जाना हो । सूरज सा उग के डूब जाना हो । सावन की हरियाली सा मुझे इक दिन बीत जाना हो । झरनों सा गिर के बस खो जाना हो । उड़ती पतंग सा बीच रस्ते कट जाना हो । पतझड़ सा बस गिर जाना हो । मेंहदी के रंग सा उतर जाना हो । मिट्टी के बर्तन सा बिखर जाना हो । बच्चों के जैसे डर के छुप जाना हो । फूलों की तरह इक दिन मुरझाना हो । दिशाओं सा मुझको बस ठहर जाना हो । पर ! मैं ही वो पंछी हूं जिसे नीड़ के निर्माण में कभी ना हारना हो ।।

One Day

चलते -चलते ,थकते -थकते ,रूकते -रूकते उठते - उठते ; कदम तुम्हारे पग -पग बढ़ते । आशा की भोर भी होती , कहीं कठिनाई की धूप चमकती , सांझ को जैसे निराशा जगती , तुम्हारी आंखें जैसे दिया चमकती ...