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Sister

दीदी तो मां जैसी  होती  है  और  उसका  प्यार  ममता ही होती  है  उसकी डाँट पापा जैसी  उसकी सलाह दादा जैसी  वो हमजोली  भी दोस्त जैसी होती है  उसकी बातें बिल्कुल मेरे मन जैसी होतीं  हैं  और उससे दूरी कुछ  ग्रहन जैसी  होती है  अखिर जो  सबकुछ पूरा  कर दे  जिसमें  हर रिश्ता हो  वो बहन ही तो होती  है  मेरी दीदी भी मुझे माँ जैसी लगती  है।                                      With love :)                                                       Your brother                                                        ...

Dare to dream and achieve

आज रात ख़्वाब में ख़्वाब देखने की आजादी मिली , बस फिर क्या था ! झट से मैंने चांद को अपने तकिए पर थपथपाया , और खुद निकल गई सैर पर ।। - Smriti Tiwari ( meri lekhani se)

Keep doing

कहते हैं अकसर चलते-चलते रस्तों में सांझ हो जाती है , पर मैंने चलते-चलते मंजिल  का सवेरा देखा है ।।       -Smriti Tiwari ( मेरी लेखनी से)

Wait for it , everything will be going damn good

पतवार थोड़ी उलझी है भंवर के अफसाने में वक़्त थोड़ा ही बाकी है तेरे जमाने में तुझे क्या पता ! एक दिन जब तेरे अन्दर का दरिया फैलेगा ना जाने कितने ही मोती बिखरेंगे नज़राने में हार मत ! वक़्त थोड़ा ही बाकी है तेरे जमाने में क्या हारना  ! क्या जीतना ! ये तो कहानी बड़ी पुरानी है इससे परे परिभाषा तुझे बनानी है तेरा जन्म ही हुआ इस धरा को सजाने में बस वक़्त थोड़ा ही बाकी है तेरे जमाने में चलते हैं ,थकते हैं ,डरते हैं ,बुझते हैं बस तेरे ही कदम ऐसे हैं जो कभी ना रुकते हैं ये जान ले कोई योद्धा आज तक ना रुका रास्तों में चंद कांटे आने से थोड़ा सबर कर  वक़्त थोड़ा ही बाकी है तेरे जमाने में ।।                                                                                                          -(Smriti Tiwari) mer...

Pollution

"इन हवाओं में घुली फिज़ाओं से गर मुलाकात हो फूलों के साथ मेरे भी खिलने की शुरुआत हो धूप पड़ते पत्तों का दर्पण सा एहसास हो फिर ओस की बूंदों से मेरा श्रृंगार हो खेतों की हरिया...

Story of every hosteler

अरे ! दीवाली आ रही है , जो सौगात में मेरे लिए छुट्टियां ला रही है मतलब इन छुट्टियों में मुझे घर जाना है , मां के हाथों का बना खाना मुझे फिर से खाना है , मुझे जल्द ही घर जाना है ।। रुक...

Inner motivation

ना हार तू ना हो भयभीत तू संघर्ष के कर्म से लिख दे बस जीत तू , तू बस चल फिर देख, मंजिल तेरी और मंजिल की तू ।। जो तू है भयभीत , तो सुन ले मन की चीख तू ले इस ज्वाला से सीख, फिर रच दे नयी रीति ...

friendship day

एक सफर की दौड़ में चलो आगे बढ़ते हैं पर बीच बीच में छुट्टी लेके जरा दोस्तों   से मिलते हैं तो क्या हुआ अगर आगे बढ़ने को हम शोलों पे चलते हैं राहत के लिए ही तो रास्तों में दोस्त जैस...