Sister

दीदी तो मां जैसी  होती  है  और  उसका  प्यार  ममता ही होती  है  उसकी डाँट पापा जैसी  उसकी सलाह दादा जैसी  वो हमजोली  भी दोस्त जैसी होती है  उसकी बातें बिल्कुल मेरे मन जैसी होतीं  हैं  और उससे दूरी कुछ  ग्रहन जैसी  होती है  अखिर जो  सबकुछ पूरा  कर दे  जिसमें  हर रिश्ता हो  वो बहन ही तो होती  है  मेरी दीदी भी मुझे माँ जैसी लगती  है।                                      With love :)                                                       Your brother                                                        ...

Story of every hosteler

अरे ! दीवाली आ रही है ,
जो सौगात में मेरे लिए छुट्टियां ला रही है
मतलब इन छुट्टियों में मुझे घर जाना है ,
मां के हाथों का बना खाना मुझे फिर से खाना है ,
मुझे जल्द ही घर जाना है ।।
रुको ! ज़रा उंगलियों पर बचे दिन गिन तो लूं ,
रुको ! ज़रा गंदे कपड़े चुन तो लूं ,
मां पापा के घोसले में मुझे फिर से चहचहाना है ,
मुझे जल्द ही घर जाना है ।।
अब तो बस एक ही दिन बचे हैं जाने में ,
पर अभी तो चौबीस घंटे हैं उस पल के आने में ,
ये घर भी ना! कितना सुंदर फसाना है,
मुझे जल्द ही घर जाना है । ।
ये सफर भी बड़ा अजीब है बीतता ही नहीं ,
पर ये भी है इस सफर से ज्यादा कोई और सफर रीझता भी नहीं है ,
पहुंचते ही घर के आंगन की महक में खो जाना है ,
मुझे जल्द ही घर जाना है ।।
मां मिलेंगी, पापा मिलेंगे
और ना जाने कितनी ही बातें होंगी,
हर इक पल को मुझे यादों की गठरी में फिर से भर लाना है ,
बस बहुत जल्द ही मुझे घर जाना है ।।
          -  smriti tiwari (meri lekhani se)

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