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Sister

दीदी तो मां जैसी  होती  है  और  उसका  प्यार  ममता ही होती  है  उसकी डाँट पापा जैसी  उसकी सलाह दादा जैसी  वो हमजोली  भी दोस्त जैसी होती है  उसकी बातें बिल्कुल मेरे मन जैसी होतीं  हैं  और उससे दूरी कुछ  ग्रहन जैसी  होती है  अखिर जो  सबकुछ पूरा  कर दे  जिसमें  हर रिश्ता हो  वो बहन ही तो होती  है  मेरी दीदी भी मुझे माँ जैसी लगती  है।                                      With love :)                                                       Your brother                                                        ...

you are a miracle but condition is when you are with you . (तम = darkness)

तू अकेला कम नहीं  एकांत कोई गम नहीं । पाखी गिरे उठे फिर दोबारा  वो ना थका सौ बार हारा  फैला पंख देखे नभ  फिर उड़ चला वो बिन सहारा  हो जाए सांझ तो अब तम सही  एकांत कोई गम नहीं । नाव जब डूबे बीच धारा  तो क्या सोचे मांझी बेचारा  चला पतवार और देख लक्ष्य तेरा बस अब तू सहारा  लहरें टिके इतना दम नहीं एकांत कोई गम नहीं ।                            © शैल स्मृति

Be united Against corona virus ..

चलिए आराम के बहाने एक बड़ा काम कर लें, चलिए थोड़ा रुक कर दुनिया की गति को एक नया आयाम दे दें, चलिए बेहतर सुबह के लिए सुंदर हम शाम कर लें, चलिए धैर्य से संकट को हम तमाम कर दें , चलिए लिए गए निर्णयों का सम्मान कर लें , चलिए  मैं ,हम और आप  ! वसुधैव कुटुंबकम्  का डिस्टिंक्शन से पास  इम्तेहान कर लें ।।                          - शैल स्मृति 

जनता कर्फ्यू

जब जनता द्वारा जनता की ही बात हो  जनता की खुशियों को घेरने आयी कोई रात हो तो हम संकल्प और संयम से आगे बढ़ें  बात मन में  ये आत्मसात हो  कि हर पल देश को जनता का ही साथ हो ।।             ~   शैल स्मृति         I support for Janta curfew          

Without you

पहर पहर और एक एक दिन  कैसे बीता तुम बिन समय का तो जैसे कुछ पता नहीं  कब भोर हुई कब शाम ढली तुम बिन रैनो की नींद गई ना भूख रही ना प्यास रही जबसे तेरा साथ नहीं  मुझमें भी अब वो बात नहीं ऐसा लगता है हर एक पल अब मैं तो हूं पर मेरा आधार नहीं  हर पग अब डगमग तुम बिन है कहने को चलना हर दिन है  कहने को चलना हर दिन है    - Shail Smriti 

Mother

क़रीब हो मगर अब दिखती नहीं , जबसे तुम गई ; इस मोहल्ले खुशियां बिकती नहीं ।। बस्ती ऐसा भी नहीं कि खाली है भीड़ सी लगी रहती है पर तुम्हें तो पता है ना ! भीड़ किसी के लिए रुकती नहीं ।।             -शैल स्मृति

In memory of my mother

मां तू मेरा सवेरा सा  फिर क्यों यहां इतना अंधेरा सा मां मैं तेरा वो अंश  जो तेरे बिना ताउम्र अधूरा सा पर मां मेरे मन का इक कोना जो आज भी नहीं है सूना  तेरी हंसी  तेरी आंखें  तेरी हर इक बातें  तेरी परवाह तेरी सलाह  मेरी घंटों तकना राह  सब इस कोने में कैद है  बस ईश्वर का इतना ही अब मुझपे फ़ैज़ है  मां साथ ही चलेंगे  साथ ही हसेंगे  साथ ही रो लेंगे  साथ ही सब होगा  बस तू दिखेगी नहीं बाकी हर पल तेरा एहसास होगा ।।                                     स्मृति शैल ( मेरी लेखनी से)

ज़िन्दगी के एक मोड़ पर

जब मन सुबह जब मन शाम कर लेते हैं  कुछ ऐसे हम ज़िन्दगी के जाम पी लेते हैं इनसे ना उनसे  बस खुद से मिलकर किस्से तमाम कह लेते हैं   कुछ ऐसे हम - - - -  रोना क्या ?हंसना क्या ? हम तो अपने मन को बस शांत कर लेते हैं कुछ ऐसे हम - - - - मोहब्बत के लिए बस मकाम है  बस उसी को रोज़ याद - और उसी के लिए काम कर लेते हैं कुछ ऐसे हम - - -  बड़ा नशा है मंजिल की राह से रोज़ फूल चुनने में हम ख़ार जब आये तो इत्मीनान कर लेते हैं  बस ऐसे ही ज़िंदगी के जाम पी लेते हैं ।।                         - स्मृति तिवारी (मेरी लेखनी )